विद्यालय इतिहास



आपको व आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं


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आज भारत का परमाणु सम्पन्न देश बनकर उभरना अत्यधिक गौरव की बात है | औद्योगिक उत्पादन और सैन्य क्षमता का विकास भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियां है, परन्तु फिर भी स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात से लेकर अब तक जो विकास के परिणाम अपेक्षित थें वे नहीं आ सके | इसका प्रमुख कारण है मानवीय मूल्यों का ह्रास, संस्कारों की सतत अवहेलना तथा लोगों का चारित्रिक पतन | इन समस्याओं का समाधान केवल शिक्षा से ही संभव है, क्योंकि सांस्कृतिक ह्रास राष्ट्र के ह्रास का मूल है | अतः देश को आवश्यकता है ऐसे विद्यालयों की जहाँ स्वभाषा में, स्वदेशी, स्वसंस्कृति एवं जीवनादर्शो के ज्ञान के साथ बालक/बालिकाओं के जीवन में अपने महापुरुषों, उनकी कृतियों एवं गौरवशाली परम्परा के प्रति गौरव एवं स्वाभिमान के भाव जागृत किये जा सके| अतः इस दृष्टिकोण को सामने रखते हुए प्राचीन गुरुकुलीय पद्धति का आधार लेकर नवीन परिवेश में समाजसेवी श्रद्धेय भाऊराव देवरस जी की स्मृति में नौएडा में भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर की स्थापना हुई जिसका भूमि पूजन 4 दिसंबर 1994 को मा० अटल बिहारी वाजपेयी जी (पूर्व प्रधान मंत्री और तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष) द्वारा हुआ| विद्यालय केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी०बी०एस०ई०) दिल्ली द्वारा मान्यता प्राप्त है| सेक्टर -12 में यह विद्यालय कक्षा 6  से 12 तक सुविधा युक्त नव निर्मित विशाल भवन में चल रहा है, जिसमें सभी कक्षा कक्ष विशाल, हवा और प्रकाश युक्त, भौतिक, रासायनिक, जीव विज्ञान, गणित, सामाजिक, भूगोल और कंप्यूटर की सुसज्जित प्रयोगशालाएं, संगीत कक्ष और विशाल क्रीडा स्थल उपलब्ध हैं |